‘अपनी बात’

कुछ विचार, कुछ भावनाएं, जो शब्दों के रूप में प्रस्तुत हॆं. यह सिलसिला अभी शुरू हुआ हॆ. निरंतर जारी रहेगा. कविता के रूप में, कहानी के रूप में, व्यंग्य के रूप में, नाटकों के रूप में इस “जिन्दा लाशों के देश” के माध्यम से.
आपका,
-दुर्गेश गुप्त “राज”

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