शब्द

शब्द
जब तक खामोश रहते हैं
मात्र शब्द होते हैं.
लेकिन शब्द जब बोलते हैं
तो जन्म ले लेती हैं
बहुआयामी परिभाषाएं
कुछ कटु
कुछ मृदु.

शब्द मुंह से निकलें
या कलम से
अर्थवान होते हैं
भाषा-बंधन से दूर
शब्द/मात्र शब्द होते हैं.
जीवन-मृत्यु
सुख-दु:ख
सबका सूत्रधार है शब्द.

भावना-विचार
प्रेम-क्रोध
हिंसा-अहिंसा
सबका जनक है शब्द.

शिशु के प्रथम उच्चारण से
विश्व के प्रथम पुरुष की वाणी तक
सबका आधार है शब्द.

शब्द-प्रश्न
शब्द-जिज्ञासा
और उसका समाधान है शब्द.

आओ हम
इस शब्द की महत्ता को-
स्वीकार कर
इसे नमन करें
और इससे विनती करें
कि वह
हमारी जिव्हा और कलम को
ऐसे शब्दों से
हमेशा दूर रखे
जो क्रोध और हिंसा के जनक हों
लोगों के दिलों में घृणा
आँखों में अंगार पैदा करने वाले हों.

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