बदला

आओ
हम सब मिलकर करें आत्महत्या
और फंसा जाएं
पंचतत्वों को
हत्या के जुर्म में.

देखते हैं
कौन बचाने आयेगा इन्हें ?
कौन करेगा इनकी पैरवी ?
कौन देगा इनकी गवाही ?
इन्हें फांसी निश्चित ही होगी.

फिर देखते हैं
आत्मा
कहाँ जाकर शरण लेती है.

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