तलाश

आदरणीय भाई साहब
सादर वन्दे
यहाँ हो रहे हैं
नित-नये
राजनैतिक दंगे.
इन्हीं दंगों का शिकार
मैं निरीह
असहाय/लाचार
आपको लिख रहा हूँ
ये खत़
मिले तो जबाव जरूर देना
हालात इस प्रकार है :

::१::

मेरी माँ
प्यारी भारत माता
मुझसे कहीं बिछुड़ गई है.
मिले तो बता देना/पता देना
उसकी पहचान इस प्रकार है :

उसका सारा शरीर
वर्तमान स्वार्थी राजनीति के-
ज़ख्मों से भरा होगा
त्वचा का रंग हरा होगा
किसी चौराहे पर खड़ी
पागलों की तरह
चिल्ला रही होगी
अपनी कोख पर
लांछन लगा रही होगी
अपनी औलाद को
निकम्मा बता रही होगी.

चेहरा सुर्ख लाल होगा
आँखों में मलाल होगा.

मिले तो बता देना/पता देना
मेरी माँ/प्यारी भारत माता
मुझसे कहीं बिछुड़ गई है.

::२::

मेरी बहिन
प्यारी बहिन
नाम नैतिकता
कहीं भटक गई है
मिले तो बता देना/पता देना
उसकी पहचान इस प्रकार है :

भ्रष्टाचार की पाशविक हरकतों से
नुची होगी.
सफेदपोश भौतिकता के बीच
लुटी होगी.
चेहरा लहु-लुहान होगा
उजड़ा-उजड़ा सा जहान होगा.

चिथड़ों में लिपटी होगी
लज्जा से सिमटी होगी
आँखों में बेवशी के आँसू होंगे
बिखरे-बिखरे से गेसूं होगें
मिले तो बता देना/पता देना
मेरी बहिन/प्यारी बहिन
नैतिकता कहीं भटक गई है.

और
जो शेष है
वह भी शुभ प्रतीत नहीं होता.

वर्तमान कंटीले झाड़-सा
ज़िस्म लहु-लुहान किये दे रहा है
भविष्य काल-सा
डसने को तैयार खड़ा है.

और/इसके बाद जो भी बचता है
शेष ?
वह शुभ है.
अपनी……….सहित,

सबका
एक अभागा मानव.

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