अहसास
आँधियां ही नहीं
हजारों तूफान
करवटें ले रहे हैं
उसके सीने में.
भूख की ज्वाला
सर्वस्व स्वाहा करने को
बेताब है.
गर्भस्थ शिशु
प्रतिक्षारत है
भौतिक जगत में प्रवेश पाने को.
लेकिन
न जाने क्यूँ
उसकी ममता
गर्भ में ही उसका गला
घोंट देना चाहती है.
उसे अपनी कोख में ही
विलीन करना चाहती है.
शायद उसे
अहसास हो गया है
ये तूफान कोई
साधारण तूफान नहीं है.
ये ज्वाला कोई
साधारण ज्वाला नहीं है.
September 26, 2008 at 1:24 am
….aapki bgiya ke phool sundar aur 1 se badkar 1 hai….. fija ko mhkate rhiye….. shubhkamnaye….